रविवार, जून 13, 2010

! ईमेल करने के लिए एकाउँट खोलना जरूरी है| !


फिल्म ताल के एक दृश्य में, मीता वशिष्ठ जो आलोक नाथ की बहन बनी है कहती हैं "भाई साहब, विक्की भले ही शातिर दिमाग हो पर दिल से बिल्कुल देहाती है|" दरअसल आलोक नाथ को विक्की में ईक्कसवीं सदी के शातिर भारतीय युवक के सारे लक्षण मौजूद होने के कारण उन्हें विक्की अपनी बेटी से शादी के लिए पसंद नहीं है, पर मीता वशिष्ठ के अकाट्य तर्क से वह हथियार डाल देते हैं| यही इस आलेख का सूत्रवाक्य है| हम भारतीय चाहे दिल से कितने भी आधुनिक क्यों हों, सादगीपूर्ण व्यक्तित्व ही पसंद करते हैं| जब कस्बे और गाँवों में रहने वाला समाज अपने नेतृत्व को हाथ में सेलफोन , बगल में लैपटाप दबाये फीलगुड, पोटा ईत्यादि चीखते हुए देखता है तो उसे अपने से कटा हुआ महसूस करता है| उसकी समस्याऐं पचास साल में भी बदली नहीं है वही रोटी, वही पानी वही सड़क और वही समाज के उच्च वर्ग द्वारा शोषण| लालू प्रसाद रोटी सड़क दें या दें, शोषण के खिलाफ मजलूमों को आवाज जरूर दे देंते हैं और यही उनकी सफलता के कारणों में एक है| सामान्य जनता का मन अभी भी अपने नेता में राजा हरीशचंद्र की छवि ढूढता है जो वेष बदल कर राज्य का पुरसाहाल लेता था|




यही ईमेज चलती है जनता के बीच!

जाहिर है एक ओर अगर रेलों में ईंटरनेट जैसी विशुद्ध अमेरिकी सुविधाऐं देने की बात करने वाले नेता हो दूसरी ओर रेलवे स्टेशन पर छापे मारने के सस्ते परंतु लोकप्रिय लालूवादी तरीके, तो भले ही दोनों जनता का धन लूटने के मामलें में एक ही थैली के चट्टे बट्टे हों, जनता जुड़ाव तो राजा हरीशचंद्र से ही करेगी बिल गेट्स से नही| चाहे लालू हों या मायावती दोनो समाज के शोषित वर्ग को समाज के उच्च वर्ग के खिलाफ खड़ा होने का हौसला देते हैं और इसीलिए उनके सर्वेसर्वा बने बैठे हैं| उदाहरण साफ है, जब मोहल्ले के पंडित और ठाकुर त्रिशूल यात्रा निकालते हैं तो कभी दलित वर्ग उनके साथ खड़ा होता है, नहीं| क्योकि उन्हे समझा दिया गया है कि रामजन्मभूमि के मलबे में कोई ऊँची जातवाला दबके नहीं मरा, वह सब तो बस नीचे खड़े नारे लगाते रहे| इसीलिए यह वर्ग महारैला में सवर्णों को लाठी चमका कर ही खुश हो लेता है, फिर चाहे पाँच साल भ्रष्टाचार में पिसता रहे| लालूश्री देहाती ही बने रहना चाहते हैं और वैसे ही दिखना चाहते हैं जैसा कि उनका वोटरवर्ग है| अगर उन्होनें हेयरस्टाईल या बोलने का लहजा बदला तो जनता कोई और लालू ढूढ लेगी| अभिजात्य वर्ग, जो राल्फ लारेन पहनना और वर्सेज लगाना सीख चुका है, अब देहाती भारतीयों को लाफिंग मैटर समझता है, इसीलिए उसे लालू भी विदूषक लगते हैं| अब जरा विषय को हल्के अँदाज की ओर मोड़ते हुए एक सच्ची परंतु मनोरंजक घटना का जिक्र करता हूँ| कुछ साल पहले जब शरद यादव केंद्रीय मंत्री थेऔर लालू विपक्ष में, तब लालू जी ने "यह आईटी वाईटी क्या होता है?" कह कर एक नयी बहस को जन्म दे दिया| दिल्ली के प्रगतिमैदान में आईटी मेला लगा था और एक दिन लालू अपने चेले चपाटों के साथ मेले में पहुँच गये | आयोजकों को किसी हंगामें का डर सताने लगा| पर लालू चहलकदमी करते हुए वेबदुनिया के स्टाल पहुँच गये| हिंदी में चलती वेबदुनिया की साईट से उन्हे कौतूहूल हुआ| वेबदुनिया के संचालक जोश में आकर लालू जी के प्रश्नों का उत्तर देने लगे| किसी ने उन्हे बहुभाषी ईमेल सुविधा के बारे में बताया| लालूजी को यह जानकर निराशा हुई कि भोजपुरी वेबदुनिया की सूची में शामिल नहीं थी| पर उन्होनें एक ईमेल एकाउँट खोला और देवनागरी का प्रयोग करके पटना के किसी प्रशासनिक अधिकारी को भोजपुरी में ईमेल भेज मारी| पंडाल के बाहर संवाददाताओं के सवालो की बौछार का उन्होनें अपनी चिरपरिचित शैली में जवाब दिया "देखिए, हम आईटी का इसलिए विरोध करता हूँ क्योकि सब कंपूटर अंग्रेजी में चलता है| इससे गरीब गुरबा का क्या भला होगा? पर वेबदुनिया वाले अच्छा काम किये हैं, अभी हिंदी में कंपूटर चालू हैं, वादा किये हैं कि भोजपुरी भी लायेंगे कंपूटर पर| हम इस चीज से बहुत खुश हूँ|" खैर अगले दिन लालूजी की फोटो छपी पेपरों में ईमेल करते हुए और आईटी के पुरोधाओं ने चैन की साँस ली|




कंपूटर चालू हैं
पर उसी दिन माननीय केंद्रीय मंत्री शरद यादव प्रगतिमैदान पहुँचे| विभिन्न कंपनियों के स्टालो का अवलिकन करने के दौरान उन्हें कोई वेबदुनिया के स्टाल खींच ले गया यह कह कर कि कल लालू वहाँ गये थे और रंग जमा गये अपना| शरद यादव भी फोटो खिंचाते रहे | तभी किसी चमचे ने कहा "मंत्री जी, कल लालूजी ने ईमेल करी थी, आप भी करिए|" शरद जी ताव में कंप्यूटर कंप्यूटर के सामने बैठ गये और तामील किया वेबदुनिया के संचालक को कि "हमें भी ईमेल करनी है|" संचालक ने कहा "मंत्रीजी, पहले आप एकाउँट खोलिए|" यह सुनते ही शरद जी किंकर्तव्यविमूढ हो गये और उन्होने अपने सचिव को तलब किया| उन्होंने बड़े भोलेपन से सचिव से कहा , "भाई, यह कह रहे हैं कि ईमेल करने के लिए एकाउँट खोलना जरूरी है| पर मेरे पास इस वक्त कैश नहीं है, अब ईमेल कैसे करूँ?"

बुधवार, मई 12, 2010

! अजीब बेटा !


लालू प्रसाद यादव का अजीब था बेटा , बेटा 1000 वाट के बल्ब के बराबर लालू यादव का नाम लिख रहा।
लालू यादव : Bitwa, ई क्या करत हो?
अजीब बेटा : आपका नाम रोशन कर रहा हूं.

मंगलवार, अप्रैल 27, 2010

! एक बार लालू जी इंडियन रेस्तौरांत पर गए !


he read the Menuall entrees come with Naan
garbanzo=19.00 $ PPkidney beans+12 $ etcToo expensive he thaught!
then he saw
Daal (Fat free)= 5 $ Per plate
Lalooji kahin
hamka dal lakar dijiye………naan extra phulphy banaiye
waiter got dal and Naan.
laloo said aur ghee kaha hai?
“ghee”??waiter said??
“hanji makhan ,phat,u kaha hai”?
water called the manager, Lalloo said “ghee kha hai?”
Manager looked puzzled, Lalloo said
ha bhai ha Gheee.idhar dekhiye Menu wa me likha hai naa……PHat is Phree???

सोमवार, मार्च 22, 2010

! दीदी आपको लालू से प्रॉब्लम है क्या ? !

पटना : रेल मंत्री ममता बनर्जी और पूर्व रेलमंत्री लालू प्रसाद के बीच विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. नया विवाद रेलवे के गोल्डेन पास को लेकर सामने आया है. ममता ने लालू प्रसाद यादव के उस पास को रद्द कर यह प्रमाणित कर दिया है कि वे अब लालू से व्यक्ति स्तर पर लडऩे पर उतारू हो गयी हैं. इससे लालू से ज्यादा ममता की अवाम में किरकिरी हुई है. अपना आजीवन रेलवे पास छिन जाने से दुखी पूर्व रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव वर्तमान रेलमंत्री ममता बनर्जी पर जमकर बरसे. उन्होंने कहा कि यह गलत परंपरा की शुरूआत हो रही है जबकि सभी रेल मंत्रियों को रेलवे का गोल्डेन पास निर्गत किया जाता रहा है. रेल मंत्री को चार लोगों का पास मिलता है जबकि रेलवे के अधिकारी को दो व्यक्ति का गोल्डेन पास मिलता है. अब अधिकारी को भी दो व्यक्ति का पास मिले और मंत्री को भी उतना ही यह ठीक नहीं लगता. इस कारण उन्होंने रेल मंत्रियों को चार लोगों का पास निर्गत करने का निर्णय लिया. तो इसमें नया क्या हो गया है.लालू प्रसाद यादव ने कहा कि किसी रेलमंत्री के द्वारा पास किया गया कोई भी प्रोजेक्ट या नियमों को अगले रेलमंत्री के द्वारा केंसिल किया जाना एक नयी परंपरा की शुरूआत है. यह लोकतंत्र के लिए शुभ नहीं है. उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि आज एक रेलवे अधिकारी को भी प्रथम श्रेणी का दो पास मिलता है और एक पूर्व रेलमंत्री को भी. इस लोकतंत्र में उतना हीं पास मिलेगा? यह उन्हें किसी दृष्टिकोण से सही नहीं लगा और उन्होंने उसे दो से चार लोगों का कर दिया. पास प्रकरण पर रामविलास पासवान ने कहा कि रेलवे का यह फैसला व्यक्तिगत लालू प्रसाद से जुड़ा हुआ नहीं है. इससे पूर्व सभी रेलमंत्रियों को वंचित होना पड़ेगा. उन्होंने कहा कि जब वह रेलमंत्री थे तो दो पास दिया जाता था उसे लालू ने बढ़ाकर चार कर दिया था. इसका फायदा सभी पूर्व रेलमंत्रियों को मिला था. पुन: ममता ने इसे घटा कर दो कर दिया तो इसका भी घाटा सभी को होगा. व्यक्तिगत लालू प्रसाद का मामला यह नहीं है. सनद रहे कि रेलवे बोर्ड ने रेलमंत्री ममता बनर्जी के आदेश पर विगत दिनो उनका आजीवन कॉम्प्लीमेंट्री कार्ड पास वी-148 को निरस्त करते हुए उनका वीआईपी दर्जा समाप्त कर दिया था. अब वह सिर्फ सांसद सदस्यों वाली सुविधाओं के हकदार हो गये. इसके तहत उन्हें एसी प्रथम श्रेणी में पत्नी के साथ रिजर्वेशन मिलेगा. श्री यादव को अब मात्र राजधानी और शताब्दी के एसी प्रथम श्रेणी कोच में सिर्फ दो सीटों से काम चलाना होगा गौरतलब है कि ममता बनर्जी के रेलमंत्री बनने के अगले दिन यानी 25 मई को 09 को लालू यादव ने रेलवे बोर्ड से अपने नाम लाइफ टाइम वीआईपी कॉम्प्लीमेंट्री कार्ड पास वी-148 जारी कराया था. साथ हीं उन्होंने उक्त सुविधा सभी पूर्व रेलमंत्री को भी देने का आदेश जारी कर रखा था लेकिन नई दिल्ली के वजाय पूर्व रेलवे मुख्यालय में बैठने वाली रेलवे मंत्री ममता बनर्जी से यह बात छिपी नहीं रह पाई और उन्होंने इस तरह से जारी पास को निरस्त करने का आदेश दे दिया. जिसके मद्देनजर रेल भवन ने इस पास को निरस्त कर दिया और उत्तर मध्य रेलवे मुख्यालय सहित देश के सभी जोनल मुख्यालयों को लालू के कॉम्प्लीमेंट्री पास बी-148 का दुरूपयोग रोकने की हिदायत दे दी है.

शुक्रवार, मार्च 05, 2010

! लालू प्रसाद लड़की से बोले 'लव यू टू' !

रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव का मानना है कि युवाओं को अपने मां-बाप की मर्जी से ही शादी करनी चाहिए। वह कहते हैं कि प्यार अच्छी बात है , लेकिन यह पवित्र होना चाहिए। रविवार को लालू प्रसाद यादव काफी रोमैंटिक मूड में नजर आए। उनके ब्लॉग पर एक लड़की ने ' आई लव यू ' लिखा है। हालांकि लालू जी नहीं जानते कि यह लड़की कौन है , लेकिन उन्होंने इसका जवाब खुलकर दिया और अंग्रेजी में कहा - ' इफ शी लव्ज़ मी , देन आई लव हर टू॥। ' इस बयान के साथ उन्होंने तुरंत जोड़ा कि यह प्यार पिता , भाई और दोस्त जैसा प्यार है। गौरतलब है कि प्रोफेसर मटुक नाथ और जूली की प्रेम कहानी के मामले में लालू की खासी किरकिरी हुई थी , क्योंकि उन्होंने मटुकनाथ और जूली का समर्थन किया था। उस घटना के बाद शायद लालू जी ने अपने विचार बदल लिए। फिज़ा और चांद मोहम्मद की कहानी पर भी लालू यादव ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि इस तरह के लोगों के साथ ऐसा ही होता है। इसी के साथ उन्होंने देश की सभी लड़कियों को संदेश देते हुए कहा कि सभी अपने मां-बाप की बात मानें। शायद लालू युवाओं के बीच अपनी लोकप्रियता बनाए रखना चाहते हैं , लेकिन इसके साथ ही उनके माता-पिताओं के बीच भी अलोकप्रिय नहीं होना चाहते। इसीलिए उन्होंने कहा , कि प्यार तो हो , पर मर्यादा के भीतर।

बुधवार, फ़रवरी 03, 2010

लालू यादव अपना खोया जनाधार पाने की कोशिश में !!

बहुत दिनों के बाद बिहार में लालू यादव की राजनीति गरमाई है। महंगाई को मुद्दा बनाकर उन्होंने गुरुवार को जो `बिहार बंद’ का आयोजन किया, उसका राज्य में व्यापक असर देखा गया ।
बिहार की सत्ता से बेदखल होने के बाद लालू यादव के मंद पड़े राष्ट्रीय जनता दल में इस अभियान से थोड़ी गति आयी है। वैसे, गत विधान सभा उपचुनाव में भी इस दल को मिली सफलता से उत्साहित होकर लालू यादव अपना खोया जनाधार पाने का जी-तोड़ प्रयास कर रहे हैं ।
अब उनकी नज़र इसी साल होने वाले विधान सभा चुनाव पर है। कांग्रेस ने उनसे किनारा कर लिया है। यही वजह है कि कांग्रेस पर ही ज़्यादा चोट करने के लिए उन्होंने मौजूदा भीषण महंगाई के खिलाफ ‘बिहार बंद’ का आह्वान किया ।
इसमें उनको रामविलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी का भी सक्रिय समर्थन मिला। साथ ही वामपंथी दलों ने भी इस पर उन्हें नैतिक समर्थन दिया ।
राज्य के विभिन्न हिस्सों में पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ-साथ बड़ी तादाद में बंद समर्थकों के जत्थे सड़कों पर उतरे। अधिकांश व्यावसायिक प्रतिष्ठान और स्कूल-कॉलेज बंद रहे । सड़क यातायात पर भी बंद का खासा असर देखा गया। रेल सेवा को बंद से मुक्त रखा गया था, कुछ जगहों पर बंद समर्थकों ने तोड़फोड़ भी की ।
राजधानी पटना में सड़कों पर उतरे हजारों बंद समर्थकों का नेतृत्व खुद लालू प्रसाद और राबडी देवी ने किया। डाकबंगला चौराहे पर जमा भीड़ को संबोधित करते हुए लालू यादव ने महंगाई के सन्दर्भ में केंद्र सरकार के साथ-साथ राज्य की नीतीश सरकार को भी दोषी ठहराया ।
उन्होंने कहा, " बिहार में जमाखोरों के खिलाफ़ नीतीश कुमार इसलिए कार्रवाई नहीं कर रहे हैं क्योंकि यहाँ सत्ता-साझीदार भाजपा वाले उप-मुख्यमंत्री सुशील मोदी जमाखोर व्यवसायियों के संरक्षक बने हुए हैं ।
बंद के दौरान राज्य भर में लालू-राबडी समेत हजारों बंद समर्थकों को पुलिस ने गिरफ्तार किया लेकिन बाद में उन्हें छोड़ दिया गया ।
उधर अपनी प्रवास यात्रा के सिलसिले में गया गए हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है, "बंद के नाम पर भारी उत्पात मचाकर राजद ने बिहार के अपने पुराने खौफ़नाक राज की याद दिलाई है । "
कुल मिलाकर इस ‘बिहार बंद’ के आयोजन से लालू यादव को भले ही अगले विधान सभा चुनाव में लाभ मिलने की उम्मीद हो , लेकिन प्रेक्षकों की नज़र में नीतीश कुमार लालू की चुनौती से ज़्यादा कांग्रेस के संभावित असर को अपने लिए बड़ा ख़तरा मानते हैं ।

बुधवार, जनवरी 06, 2010

! ... मेरे पैसे ... !

राबरी : हाय! हाय! मेरे पैसे डूब गए!"
लालू : "कहाँ डाले थे?"
राबरी : "विदेश में।"
लालू : "अरे, कौन से देश में?"
राबरी "दुबई।"
लालू : "ले, यह तो नाम से ही सावधान होना चाहिए था!"
राबरी : "???"
लालू : "और क्या--वहां नकद डूबाई जाती है..."

शुक्रवार, दिसंबर 04, 2009

! भोजपुरिया !



गयिया को चारा खिलाते रहिये !


भैसिया को चाराते रहिये !


भोजपुरिया गाना गाते रहिये !


प्रलियामेंत्वा में भासन सुनते रहिये !


रबरी जी को 1 4 3 कहत्येय रहिये !


रेलवे को पुपू बजाते रहिये!


रेलवे को आगे बदतेयेय रहिए !


बिहार में लालटेन दिखातेतेय रहिये !


सोनिया जी को थोड़ा भोजपुरी सिखाते रहिये !


जय माता जी बोलते रहिये !

गुरुवार, नवंबर 19, 2009

! जिग्सव पुज्ज्ले !

After completing a jigsaw puzzle he'd been working on for Quitesometime, Laloo proudly shows off the finished puzzle to Afriend. "It Took me only 5 months to do it," Laloo brags. "Fivemonths? That's too long." the friend exclaims. "You are a fool,"Laloo replies. "Read the box, it says "5-7 years".

शुक्रवार, अगस्त 14, 2009

! CHOLESTROL FREE !


लालू जी एन्तेर्स अ शॉप एंड शौट्स , " वेयर 'स माय फ्री गिफ्ट विथ थिस आयल ?"
शोप्कीपेर : "इसके साथ कोई गिफ्ट नहीं है , लालूजी "
लालू जी : इसपे लिखा है कोलेस्ट्रोल फ्री "

गुरुवार, जुलाई 09, 2009

! हैप्पी बिर्थ डे !


गयिया को चारा खिलाते रहिये !
भैसिया को चरते रहिये !
भोजपुरिया गाना गाते रहिये !
प्रलियामेंत्वा में भासन सुनते रहिये !
रबरी जी को कहत्येय रहिये !
रेलवे को पुपू बजाते रहिये !
रेलवे को आगे बदतेयेय रहिए !
बिहार में लालटेन दिखातेतेय रहिये !
सोनिया जी को थोड़ा भोजपुरी सिखाते रहिये !
जय माता जी बोलते रहिये !

सोमवार, जून 08, 2009

! बढ़ती महेंगाई पर लालू !


ये जो प्राइस राइज़ है, ये बिल्कुल नॅशनल ही नहीं इंटरनॅशनल क्राइसिस है. बहुत सारे देशों में अन्न नहीं मिल रहे हैं जैसे कि मैं अभी मलेशिया गया था, वहाँ कौलालंपूर मैं गया था, तो उन राष्ट्रों में, बांग्लादेश, बगल के राष्ट्र हैं, युरोपियन कौंट्रिस में भी ग्रैन को छोड़ दीजिए पर बाकि चीज़ें हैं, फ्रूट हैं, या अन्य चीज़ें हैं, या ग्रैन नहीं मिलता लोगों को. काफ़ी हार्डशिप है इन कंपॅरिज़न टू इंडिया. जो अनाज, आटा, दाल, चावल.

और हम अपने देश में जो लोग हैं भारत के नागरिक, कम से कम भोजन रोटी, मान लो कई एक आइटम नहीं मिले पर नमक रोटी का भी प्रबन्ध भी मिनिमम जो होना चाहिए वो हम लोगों ने किया है यहाँ पर. एक्सपोर्ट को रोका, बहुत सारी चीज़ों में हमने रियायतें दी, कस्टम ड्यूटी, एक्साइस ड्यूटी, को भी हमने .

और दुनिया भर में जो फुएल है, स्टील है, सिमेन्ट है, स्टील में भी कुछ राहत मिला. तो भारतीय रेल जो है, आज़ादी के 60 साल के बाद फुड ग्रेन्स को जो हमने स्टोर कर दिया,ढो करके यहाँ पर मतलब, बफर स्टेट हमने. हमको ज़रूर नहीं है अनाज और गेहु माँगने का. पहले मंगा भी लिया अब समस्या हो रही है कि इसका डिस्पोज़ल कैसे करें.

और हमने यहाँ ज़रूर जो फॉर्वर्ड मार्केट था, मुंबई से जो संचारित होता था , एसेन्षियल कमॉडिटीस के कई एक आइटम्स पर इसको हमने समझा और विरोध करके इसको वेक्केंट कराया और नतीजा है को हमरा जो ग्रैन है , राइस है, ये जो प्राइवेट प्लेयर्स थे, फॉर्वर्ड मार्केटवाले किसानों से सीधा जा के उँचा दम दे के ले लेते थे.

तो उसको समाप्त करने के बाद हमने एलान किया है कि मेरा जो भयानक योगदान मेरा हैं, शरद पवार जी के आजू बाजू में दवा कर रहे हैं. ये हमने साफ साफ कहा कि एक कड़वा , एक भी छटाक़ प्राइवेट लोगों का गेहु का हम लोडिंग नहीं करेंगे और उसको बंद करो. हमारा पहले एफ सी आई का लोडिंग होगा. और सीधे किसानो को जो समर्थन मूल्य दिया है हमने वीट का या राइस का, इसका भी हमको लाभ हुआ. तो इसका दूसरी तरफ नुकसान भी हुआ. इसको कोवोर्डैनेट करना चाहिए था, और समय लगता है इस में. आज बफर स्टेट हमारा हो गया है.

फुएल का दाम आप जानते हैं. जितना इंडिया कन्स्यूम करता है, जितना हमारे लोग उपभोग कर रहे हैं. एक एक आदमी को फॅमिली को जो होप्स हैं, उमको पाँच-पाँच गाड़ी हैं और ये ज़्यादा कन्संप्षन हमारा बड़ा है.

भारत में , हम लोगों के देश में कोयला से, लकड़ी से चूल्‍हे चलते थे. अब ये सब चीज़ें समाप्त हो के अब हर आदमी गॅस सिलंडर बात करता है.

दुनिया में हम वन थर्ड डीसल कन्स्यूम करते हैं. इंडियन रेलवे हम वन थर्ड जो टोटल आता है भारत में. तो वन थर्ड उसे करने के बाद भी हमने भाड़ा में बढ़ोतरी नहीं की. राहत दिया लोगों को इंडियन रेलवे ने भाड़ा कम करके राहत दिया लोगों को.

अभी जो फुएल का दाम बढ़ा तो दुखदायी ज़रूर हैं, रियलिटी, सबको समझना पड़ेगा सचाई को. कोई भी रहेगा तो क्या करेगा. वह हमेशा जो तेल नहीं है, हमेशा हमने देखा है युरोपियन कंट्रीज़ में भी बवाल मच रहे थे. तो उस में भी मिनिमम हम लोगों ने, ये समझते हैं की मिनिमम बढ़ाए है. ये ज़रूर है की चूल्हा जो 50 रुपया गॅस सिलंडर पर दाम बढ़ा तो.

कई राज्य सरकारों से अपील किया गया. प्रधानमंत्रीजी ने भी अपील किया इसको आप लोग भी कन्स्यूमर्स को जो वॅट लगता है, उन चीज़ों पर, सेल्स टॅक्स हम बढ़ते हैं आप आमदनी करते हो, कम करो. एवेरिब्डी हैज टू रियलाइज अंड शेअर दी बर्डेन. ये हर कि ज़िम्मेवारी है.

तो ये स्थिति है और मैं समझता हूँ कि स्थाई नहीं रहेगा और निकट भविष्य में इस पर काबू पाया जाएगा.

और फिर बिचौलिए हैं, बिचौलिए हैं जो पे कमीशन का जो तंखा जो बढ़ोतरी हुई तो इसका भी उसी दिन से लोगों ने कि चलो-चलो अपने भी महेंगा करो. तो किसान को न मिलकर के बीच के जो लोग हैं , आढत में रहनेवाले, फिर रिटेलर्स तक में ये लोग इसका नाजायज़ फ़ायदा उठते.

और ये हर राज्य सरकार का ड्यूटी हुआ करता है. ईच एंड एवेरी कलेक्टर आफ दी कॅनस्र्न्ड डिस्ट्रिक्ट इज रिस्पोंसिबिल. माने की उनकी ड्यूटी है, कंट्रोल करना अपने नागरिकों को, सामानो को , एसेन्षियल कमॉडिटीस एक्ट इंपोज़ करके करना.

चिंताजंक है. ठीक है भारत डेवेलपिंग-डेवेलप्ड कंट्री है, ग़रीबी भी ज़्यादा है. तो आम आदमी उसको सफ़र तो ज़रूर करता है, पर आम आदमी के लिए हम फुड ग्रैन का फ्री इंतज़ाम भी हमारा है. 35 kg उनको जो ग़रीब लो हैं, अंतिम आदमी उनको हम फ्री रॅशन देते हैं. उस रॅशन का डिस्ट्रिब्यूशन पीपल को होना चाहिए.

और फिर जॉब भी चाहिए तो हम रोज़गार ग्रांट स्कीम जो हमारा चलता है देश भर में कि छ्ह दिन का काम लोगों को मिले ताकि नमक-रोटी का प्रबन्ध हो. इनको भी इंपलिमेंट करना चाहिए राज्य सरकार को. ट्रूली ब्यूरोकरेसी को. ये नहीं हो पाता तो आमदनी नहीं रहेगी तो सफर करते. जिनकी जो आमदनी है, हैरर्की है, सिटिज़न का जो हैरर्की है तो उस हैरर्की में जो ग़रीब आदमी है , मेनू है जो भोजन का जो टीवी पर दिखाया जाता है तो पीपल, पहले भी कहाँ पीपल को मिलता है. फ्रूट चाहिए, तो दूध चाहिए, तो ये चाहिए, तो नास्टा चाहिए, तो एग चाहिए, अंडा चाहिए - ये शर्तन कुछ ही लोग हैं जो उपभोग करते हैं बाकी तो भात दल मिला तो नहीं मिला तो आलू का तरकारी रसदार बनाया खा लिया, नमक रोटी खा लिया.

तो ग़रीब आदमी तौर तरीका मालूम है झेलने का, बिचारों की मजबूरी हैं. फाइ र्भी उनकी हार्डशिप को कम करना है तो उसके सेवरल स्कीम्स हमारे यहाँ है. पी. डी .एस रॅशन, या अन्य चीज़ें हैं. वह प्रवाइड करते है तो, एनसोर करना चाहिए उनको.

शुक्रवार, जून 05, 2009

लालू और सीसा


लालू गए येकशोपकीपेर के पास और पुचा ए भइया
ए बंदरवा का फोटू कितने का हे रे ?
शॉप कीपर : साहब वू फुटवा नहीं है साहब वो तू सीसा है !

रविवार, मार्च 29, 2009

! यू र था बेस्ट !

! थॅंक्स फॉर दी कोमेंटेटर्स !

मेरे ब्लॉग पर, मेरे इंटरव्यू पर, मेरे राय पर, जो देश प्रदेश से जो भी कमेंट्स आए हैं उसमें से बहुत सारे कमेंट रेलवे से संबंधित हैं. वो सरहाणीय हैं.
कुछ लोगों ने भ्रांति कुछ पॉलीटीशन और बहुत लोग भ्रांति पाल लेते हैं, ये सिनेमा में कोई मैं डॅन्स करने जा रहा हूँ, कोई रोल करने जा रहा हूँ. ऐसी बात नहीं है. मैने कहा की राजनीति, पोलिटिशन को डिसक्रेडिटेड किया जा रहा है, डिसरेस्पेक्ट हॉ रहा है फ्रॉम दी एवेरी कॉर्नर ऑफ दी सोसाइटी. और जो नेताओं के प्रति, जो पोलिटिशन है डेमॉक्रेसी में, वो हाई स्ट्रेचर है उँचा स्थान है.
तो बहुत सारे लोग जो रोल कही नेता का जो बनावटी करके दिखाया जाता है फिल्म में कोई बनता है तो उसमें बिल्कुल अजीब वो, हास्यास्पद बात रहती है. इसलिए हम जब पाचवी पास वाला जो था स्टार टी वी पे मैं गया था तो शाहरुख ख़ान को मैने कहा था की देखो पोलिटिशन्स का राजनीति को भ्रष्ट करना, संस्था को यह लोग जो करते हैं, तो अगर आप कोई फिल्म बनाते होगे और नेताओं को भी आप लोगो ने बना के रोल दिया होगा नेता सो कॉल्ड जो बनता है बनावटी, तो ऐसे समी में जहाँ रोल नेता का होगा कोई बात का, तो हमको बुलाना.
फिर भी जो मिस किए हुए लोग उनके लिए मैं बताउँगा की भारतीय रेलवे कल का घाटे का सौदा था एन दी ए सरकार का. बत्तर हालत था. और एक लाख़ करोड़ सर्प्लस मनी हम जेनरेट करके हम मंत्रालय को जब पाँच साल होगा तब छोड़ेंगे, तब बताएँगे लोगों को. उसका ग़ूढ भी मैं लोगों को बताउँगा. थॅंक्स फॉर दी कोमेंटेटर्स , वह जिन लोगों ने कमेंट्स दिया हैं. अंड आय इन्वाइट देम टू कंटिन्यू युवर कॉमेंट्स, गिव मी सो तट आई कॅन टेक बेनेफिट ऑफ इट. आई आम नाट सो, आई विल नाट बेड. आई फील हॅपी. तो जिन्होने लालू यादव को नहीं देखा है, कान से सुना है तो उनके मन में भ्रांतियाँ रहती होंगी.
जिन्होने ताजमहल को देखा नही कान से सुना तो ग़लत परिभाषित करते होंगे. जिन्होने ताजमहल को देखा उनके ज्ञान का, दिमाग़ का कुंडली खुल जाता है और ढंग से विश्लेषण करेंगे . हियर से और हमारे इमेज को जो टार्नीश करने का हमारे जो पोलिटिकल ओपोनेंट्स खास करके इन लोगों ने हमारे इमेज को टार्नीश करने का लगातार देश और प्रदेश में अनर्गल बातें मेरे ज़बान में मोहिमो में, प्रिंट मीडीया के बहुत सारे लोगों ने उस को प्रचारित किया है.
इमेज को टार्निश किया है.कोई चीज़ नज़दीक से देखोगे और जो मेकप करके जो आर्टिस्ट जाते हैं सो वो अलग रूप नज़र आएगा. अब बिना मेकप का देखोगे तो भारी अंतर नज़र आएगा.

मंगलवार, फ़रवरी 17, 2009

! इंटरव्यू !


इन्तेर्विएवेर : लालूजी आपने अपने बेटी की शादी के लिए ज़बरदस्ती गाड़ी ले ली कार शोरूम से । इस के बारे में आपको क्या केहना क्या है ?
लालू : अरे हम थोडी ज़बरदस्ती करना चाहते थे । हम प्रेम से पूछे रहे तो ऊ बोले नही दे सकते । अब और कौनो चारा ही नही था का कारेन