गुरुवार, मई 30, 2013
शनिवार, मार्च 02, 2013
! लालू का बेटा परीक्षा में फेल !
जैसे लालू के बेटे, वैसा ही उनका दोस्त...
राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव बीए प्रथम वर्ष की परीक्षा में फेल हो गए...
इस खबर के बाद मां राबड़ी देवी बहुत दुखी थीं...
उन्होंने उसके कमरे में जाकर पूछा...
राबड़ी: बेटा, का करत हो...
बेटा: एक दोस्त को चिट्टी लिखत हूं...
राबड़ी: पर बेटा, तुमहार लिखना तो आवत नहीं...
बेटा: वह ससुरा भी तो पढ़ना नहीं जानत...!!!
मंगलवार, फ़रवरी 12, 2013
! लालू ने कहा- पगला गये हैं बाबा रामदेव !
नई दिल्ली। पहले अरविंद केजरीवाल और अब बाबा रामदेव के विवादास्पद बयान के कारण संसद में एक बार फिर जमकर हंगामा हुआ, और इस हंगामे के केंद्र बने बाबा रामदेव। सांसदों में संसद में बाबा के इस बयान को गैरजिम्मेदार और आलोकतांत्रिक बताते हुए जमकर इसकी निंदा की। यहां तक लालू प्रसाद यादव ने तो बाबा को पागल ही कह ड़ाला। रामदेव ने कहा था कि संसद के भीतर हत्यारे, लुटेर और जाहिल बैठे हैं। बाबा रामदेव ने कहा था कि संसद में कुछ लोग अच्छे भी है मगर ज्यादातर लोग हैवान हैं। बाबा रामदेव के इस आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद खासा हंगामा खड़ा हो गया है और चारों तरफ से प्रतिक्रियाएं आनी शुरु हो गई हैं। वहीं समाजवादी पार्टी के सांसद शैलेंद्र कुमार ने बाबा रामदेव को विशेषाधिकार हनन का नोटिस भेजा है। इस मामले पर तारिक अनवर ने कहा है कि उनके बयान को गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है, जबकि कांग्रेस नेता सत्यव्रत चतुर्वेदी ने कहा है कि सांसदों की बाबा के सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है। भाजपा के यशवंत सिंहा ने कहा है कि सांसदों का अपमान करके लोग हीरो बनते नजर आ रहे है। आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद ने बाबा रामदेव को मेंटल केस’ करार दे दिया है। उन्होंने कहा कि जब अब्दुल कलाम साहब जैसे लोग कह रहे है कि लोकपाल के आने से भ्रष्टाचार पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, तो फिर इसपर क्यों जोर दिया जा रहा है?
सोमवार, दिसंबर 17, 2012
! खो गई लालू की लालिमा !
बिहार और लालू. एक समय में दोनों एक दूसरे के
पर्याय माने जाते थे. प्रदेश की राजनीति में बादशाहत कायम करने वाले
मसखरे-से भदेस नेता लालू प्रसाद यादव अब खामोश हैं. बीते विधानसभा चुनाव
में उनकी पार्टी की हुई जबरदस्त हार ने उन्हें हरिनाम याद दिला दिया है.
बड़बोले लालू के मुंह बोल फूटते नहीं सुना जा रहा. इसे बिहारी राजनीति में
दंबई के सूरज का डूबना माना जाता है. इस पराजय ने लालू के बड़बोलेपन पर
ब्रेक ही नहीं लगाया है बल्कि उनके द्वंद्व को भी बढ़ा दिया है कि वे अपनी
मसखरेपन वाली छवि को त्यागे या फिर “परिपक्व” राजनेता की तरह फिर से उठ
खड़े हों. दोराहे पर खड़े लालू की यह सोच रही है कि गंवई अंदाज उन्हें जनता
से सीधे जोड़ती है, वहीं उन्हें एक अ-गंभीर नेता के रूप में प्रस्तुत करती
है.
सिर्फ राजद ही नहीं बल्कि सूबे में यह
फुसफुसाहट स्वर लेने लगी है कि अब लालू युग का अंत हो रहा है. इस युगांत की
सुगबुगाहट लालू की लालिमा को धूमिल करने के क्रम में है और इसे वे भी
बखूबी समझने लगे हैं. बेटे तेजस्वी को राजनीति के फलक पर ला कर अगली पीढ़ी
में अपनी पहुंच बनाने की योजना पर लालू ने वैसे ही सोच को सामने रखा जैसा
कि राबड़ी के समय में सोचा था. लेकिन वो समय और था – अब का समय कुछ और.
सूबे की राजनीति आरंभ से ही “क्रानी पॉलिटिक्स’’ की रही है. इसकी जटिलता की
उलझन में लालू ने अपने लिए दो दशक पहले डोर का सिरा ढूंढ़ लिया था. लेकिन
डोर आखिर बगैर सुलझाये कितना खींचा जा सकता है, अंततः वह इस विधानसभा चुनाव
में टूट गया. यूं तो 15 वीं लोकसभा चुनाव में ही डोर के कमजोर होने का
अंदेशा हो गया था लेकिन लालू ने इस चुनावी वैतरणी को भी इसी के सहारे पार
लगाने की कोशिश की जो नाकाम रही. उनके बयानों पर गौर करें – लालू ने पहले
तो यह कहा कि अब कोई सवर्ण मुख्यमंत्री नहीं बन सकता तो फिर कुछ दिनों बाद
सवर्णों को दस प्रतिशत आरक्षण देने की बात कहकर उन्होंने खुद को हंसी का
पात्र बना दिया. इसी तरह छात्रों को साइकिल की जगह मोटरसाइकिल का लॉलीपॉप
देकर भी वे खुद को उपहास का पात्र बना रहे थे. इस तरह के बयान उनकी अकुलाहट
और अ-गांभीर्यता को परिलक्षित करता है. आजादी के बाद की राजनीति अब अपने
परिपक्वता की ओर अग्रसर है और बिहारी जनमानस इस तरह के बयानों को पचा नहीं
पा रहा. लालू प्रसाद के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या वाकई वे
भविष्य में बिहार की राजनीति में अपने को प्रासंगिक बनाए रखने के लिए ऐसा
करने का साहस जुटा पाएंगे? शायद नहीं. दरअसल, लालू को इसका एहसास पहले से
ही हो गया था कि इस चुनाव में वे बुरी तरह परास्त होने वाले हैं, इसलिए
उन्होंने अपने बेटे तेजस्वी को राजनीति के मैदान में उतार दिया ताकि पांच
साल के बाद दूसरी पीढ़ी कमान संभालने के लिए तैयार हो. 1997 में भी लालू
प्रसाद ने तब ऐसा ही किया था जब वे चारा घोटाले में नाम आने की वजह से
सत्ता छोड़ने वाले थे. तब उन्होंने अपनी पत्नी राबड़ी देवी को बिहार का
राजकाज सौंप दिया. फलस्वरूप 1990 में पिछड़ों की राजनीति और सामाजिक न्याय
के मसीहा के तौर पर उभरा बिहार का सबसे कद्दावर और करिश्माई नेता धीरे-धीरे
अपनी चमक खोने लगा.
उनके जीवन में तीन ऐसे पड़ाव आए जहां से लालू की राजनीति का मर्सिया
गाया जाने लगा. पहला पड़ाव, जब लालू प्रसाद का नाम चारा घोटाले में आया.
फिर दूसरा पड़ाव जब उन्होंने सत्ता राबड़ी देवी को सौंप दी और फिर तीसरी व
अंतिम गलती कि 2005 के चुनाव में परास्त होने के बाद भी सबक न ले सके, अपनी
असलियत को नकारते रहे. वास्तव में लालू बिहार में सवर्णों की जकड़न से तंग
लोगों की आकांक्षा के तौर पर उभरे नेता थे लेकिन बिहार की सत्ता मिलने के
बाद पहले तो उन्होंने खुद को सरकार का मुखिया समझा, फिर खुद को सरकार समझने
लगे और आखिरी दौर वह भी आया जब लालू खुद को ही बिहार भी समझने लगे. उनके
गुरूर ने उन्हें नायक से अधिनायक बना दिया, जो उन्हें विनाश के इस मुहाने
तक ले आया. अगर लालू की राजनीतिक के अतीत और वर्तमान पर नजर दौड़ाएं तो
उनकी राजनीति ने अचानक ही यू-टर्न नहीं लिया है. लालू की सबसे बड़ी कमजोरी
रही कि वे अपने कार्यकर्ताओं से कभी नजदीकी रिश्ता नहीं बना सके. पूरे सूबे
की तो बात छोड़िये, अपने गृह जिले गोपालगंज में भी लालू की पकड़ अब इतनी
नहीं रही कि वह छह में से एक भी सीट अपनी पार्टी को दिलवा सके. इस चुनाव
में उन्हें अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक नुकसान हुआ है. इसका कारण है कि
लालू का “माय” यानी मुसलिम-यादव समीकरण तो पहले ही ध्वस्त हो चुका था, इस
बार बड़े पैमाने पर इनके खेमे से यादवी आधार भी खिसका है, वरना कोई कारण
नहीं कि 12-13 प्रतिशत आबादी वाले यादव जाति का वोट यदि एकमुश्त लालू के
खाते में जाता तो इतनी बुरी हार नहीं होती. वास्तव में जातीय राजनीति का यह
सिद्धांत है कि अकेले कोई जाति किसी एक नेता के साथ बहुत दिनों तक नहीं रह
सकती. यादव लालू प्रसाद के साथ तभी रहेंगे जब और पिछड़ी जातियां उनके साथ
हों. दूसरी पिछड़ी जातियों में आधार खिसकेगा तो यादव भी उनके साथ नहीं रह
सकते. ताजा राजनीतिक माहौल में लालू के सामने चुनौतियों का पहाड़ खड़ा है.
तीन साल के पहले उन्हें खुद को साबित करने का कोई दूसरा अवसर नहीं आने
वाला. 2014 में लोकसभा का चुनाव होगा, तब तक लालू को अपनी नीतियों की
समीक्षा करने और सूबे के गांव-गांव तक फिर से अपनी पैठ बनानी होगी. बढ़ती
उम्र के साथ उनके सामने नीतीश की खामियों को उजागर करने की भी चुनौती होगी,
वरना हरिनाम के जाप के अलावा और कोई और विकल्प नहीं है.सोमवार, नवंबर 05, 2012
मंगलवार, अक्टूबर 23, 2012
गुरुवार, अगस्त 02, 2012
सोमवार, जुलाई 02, 2012
बुधवार, जून 06, 2012
! लालू प्रसाद यादव निर्मल दरबार मे !
लालू :- घर से
बाबा :- मेरा मतलब है कहा रहते हो
लालू :- अब का प्रशनवा पूछ रहे हो, घर मे ही रहता हूँ ओर का तबेले मे रहूँगा ?
बाबा :- मेरा मतलब है कहा रहते हो
लालू :- अब का प्रशनवा पूछ रहे हो, घर मे ही रहता हूँ ओर का तबेले मे रहूँगा ?
बाबा :- नाम क्या है
लालू :- लालू प्रसाद यादव
बाबा :- लालू की जगह चालू लिखा करो
लालू :- चालू तो हम है ओर देखिये ये लिखने पढ़ने की बाते ना करे तो ही ठीक रहेगा
बाबा :- ये चारा क्यू आ रहा है बीच मे,चारा खाया है कभी
लालू :- उ तो कई बरस पुरानी बात है अब तो मामला दब चुका है
बाबा :- यही कृपा रूक रही है जाओ थोड़ा चारा खाओ कृपा आनी शुरू हो जाएगी
लालू :- बुदबर्क समझे हो का हम चारा कैसे खा सकते है
बाबा :- तूमने ही तो कहा है की खाया था
लालू :- उ तो कागजो मे खाया था
बाबा :- तो अब की बार प्लेट मे खाना
लालू :- चल ससुर का नाती कुछ ओर इलाज बता
बाबा :- ये माया क्यू आ रही है बीच मे
लालू :- आरे आप गलत दिशा मे जा रहे है, माया तो यूपी मे है तनिक दूसरी ओर आइए ममता को देखिये
बाबा :- मूर्ख मैं उस माया की नहीं इस माया की बात कर रहा हु धन की दोलत की
लालू :- धन तो सुर्क्षित है विदेस मे है ना
बाबा :- तो अपने देश मे लाओ ओर थोड़ा मेरे अकाउंट मे डलवाओ
लालू :- तोहार का ना डलवा दूँ जेलवा मे
बाबा :- आप तो गरम हो रहे है कुछ ठंडी चीज खाइये , रबड़ी ये रबड़ी कहा से आ रही है बीच मे
लालू :- अरे हो ढोंगी बाबा हमरी दुलहनवा का नाम ना ले तो ही ठीक रहेगा, हमका का बुदबर्क समझे हो हम देश का नेता है देश चलाता है ओर तू हमका चला रहे हो
बाबा :- प्रभु गुरुदेव कोई रास्ता बताइये की हमारे धंधे को कानूनी लाइसेन्स मिल जाये
लालू :- ठीक है जाइए अपनी कमाई का आधा हिस्सा हमरे खाते मे डलवाईए लालटेन जलाईए सरकारी कृपा आनी शुरू हो जाएगी
लालू :- लालू प्रसाद यादव
बाबा :- लालू की जगह चालू लिखा करो
लालू :- चालू तो हम है ओर देखिये ये लिखने पढ़ने की बाते ना करे तो ही ठीक रहेगा
बाबा :- ये चारा क्यू आ रहा है बीच मे,चारा खाया है कभी
लालू :- उ तो कई बरस पुरानी बात है अब तो मामला दब चुका है
बाबा :- यही कृपा रूक रही है जाओ थोड़ा चारा खाओ कृपा आनी शुरू हो जाएगी
लालू :- बुदबर्क समझे हो का हम चारा कैसे खा सकते है
बाबा :- तूमने ही तो कहा है की खाया था
लालू :- उ तो कागजो मे खाया था
बाबा :- तो अब की बार प्लेट मे खाना
लालू :- चल ससुर का नाती कुछ ओर इलाज बता
बाबा :- ये माया क्यू आ रही है बीच मे
लालू :- आरे आप गलत दिशा मे जा रहे है, माया तो यूपी मे है तनिक दूसरी ओर आइए ममता को देखिये
बाबा :- मूर्ख मैं उस माया की नहीं इस माया की बात कर रहा हु धन की दोलत की
लालू :- धन तो सुर्क्षित है विदेस मे है ना
बाबा :- तो अपने देश मे लाओ ओर थोड़ा मेरे अकाउंट मे डलवाओ
लालू :- तोहार का ना डलवा दूँ जेलवा मे
बाबा :- आप तो गरम हो रहे है कुछ ठंडी चीज खाइये , रबड़ी ये रबड़ी कहा से आ रही है बीच मे
लालू :- अरे हो ढोंगी बाबा हमरी दुलहनवा का नाम ना ले तो ही ठीक रहेगा, हमका का बुदबर्क समझे हो हम देश का नेता है देश चलाता है ओर तू हमका चला रहे हो
बाबा :- प्रभु गुरुदेव कोई रास्ता बताइये की हमारे धंधे को कानूनी लाइसेन्स मिल जाये
लालू :- ठीक है जाइए अपनी कमाई का आधा हिस्सा हमरे खाते मे डलवाईए लालटेन जलाईए सरकारी कृपा आनी शुरू हो जाएगी
रविवार, मई 06, 2012
गुरुवार, अप्रैल 12, 2012
! मुर्गी तुम्हारी !
शुक्रवार, मार्च 30, 2012
! बहरी और गूंगी !
शुक्रवार, फ़रवरी 10, 2012
! जल्लाद ही नहीं सेक्सी भी हैं लालू प्रसाद यादव !
रांची। लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव को किसी ने जल्लाद कहा तो किसी ने सेक्सी।भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और झारखंड प्रदेश प्रभारी सुषमा स्वराज ने लालू यादव को जल्लाद कहा तो छोटे पर्दे की मशहूर अभिनेत्री श्वेता तिवारी ने उन्हें सेक्सी कहा।
दरअसल सुषमा स्वराज ने झारखंड में कुछ दिनों पहले चुनाव प्रचार के दौरान कहा था कि लालू प्रधानमंत्री बनेगें या गृहमंत्री यह तो वह नहीं जानती लेकिन वह तिहाड़ जेल के जल्लाद अवश्य बनेंगे
मालूम हो कि सुषमा ने लालू के उस बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त कर रही थी जिसमें लालू ने छह अप्रैल को बिहार के किशनगंज जिले में एक चुनावी सभा में कहा था कि अगर वह गृह मंत्री होते तो वरूण गांधी को उनके कथित मुस्लिम विरोधी बयान के लिये रोड रोलर के नीचे कुचल देते।
उन्होंने कहा कि लालू का सपना देश का प्रधानमंत्री या गृहमंत्री बनना है। उनका सपना पूरा होगा कि नहीं वह तो चुनाव के बाद का मामला है लेकिन यह सत्य है वह तिहाड़ जेल के जल्लाद अवश्य बनेगें।
वहीं सुषमा स्वराज के इस बयान से आहत होकर लालू ने उन्हें पूतना कह डाला। लालू ने कहा कि उन्हें भी इतिहास की जानकारी है और बोलना आता है। लालू ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगर वो जल्लाद हैं तो सुषमा पूतना हैं।
गुरुवार, जनवरी 05, 2012
! अगर लालू प्रधानमंत्री होते !
लालू प्रसाद यादव को तो सभी जानते हैं। वो वही करते हैं जो उन्हें अच्छा लगता है. अब अगर उन्हें देश का प्रधानमंत्री बना दिया जाए तो भारत का तो नक्शा ही बदल जाएगा. और नक्शा बदले या न बदले कुछ तो बदलाव होंगे ही. इन बदलावों पर जरा अपनी नजरें इनायत करें:-1. राष्ट्र परिधान:- धोती कुर्ता
2. राष्ट्र पेय:- ताजा भैंस का दूध
3. राष्ट्र पशु:- भैंस
4. राष्ट्र खेल:- गुल्ली डण्डा
5. राष्ट्र भाषा:- इंग्लिशवा
6. राष्ट्र खिलौना:- ए.के 47
7. राष्ट्र परिवार नियोजन योजना:- हम दो हमारे दर्जन
8. राष्ट्र डॉक्यूमेंट्री फिल्म:- लालू बन गया जेंटलमैन
9. राष्ट्र गाड़ी:- भैंस की सवारी
10. राष्ट्र स्लोगन:- जब तक रहेगा समोसे में आलू, तब तक रहेगा हमारा पीएम लालू
गुरुवार, दिसंबर 01, 2011
! तलाक लेने के फायदे !
बुधवार, नवंबर 02, 2011
! लालू यादव उस पर धोखाधडी !

लालू यादव उस पर धोखाधडी का राबड़ी देवी संदिग्धों. ही है कि मैं राजनीति में इतने व्यस्त किया गया है मैं शायद ही किसी भी समय मिलता है प्यार करने आते हैं कैसे हम इतने सारे बच्चों राबड़ी इसे बनाने किया जाना चाहिए दूसरों के साथ बाहर... "तो वह अपने बंगले को अप्रत्याशित रूप से एक दोपहर और यकीन है कि पर्याप्त चला जाता है वह दरवाजा खुलता है अपने चौकीदार की बाहों में राबड़ी देवी पा. . खैर, लालू यकीन है कि गुस्से में है. अपने कुर्ते में जेब से बाहर बंदूक लेता है. के रूप में वह ऐसा करता है, वह दु: ख के साथ दूर है. अपने सिर पर बंदूक और अंक लेता है, ट्रिगर खींचने के लिए तैयार है. राबड़ी "नहीं ऐसा gazab चटाई करो!! (नहीं डॉन" टी इस) लालू उत्तरों "चुप कर कल muhi agli goli का शिकार तू hogee चिल्लाता है!"
रविवार, अक्टूबर 02, 2011
! लालू का अन्दाज !

अपनी बात कहने का लालू का खास अन्दाज है, यही अन्दाज लालू को बाकी राजनेताओ से अलग करता है, लालू का अन्दाज ही कुछ निराला है.पत्रकार तो इनके आगे पीछे मन्डराते रहते है, और बस इन्तजार करते है कि कब लालू कुछ बोलें और ये लोग छापे…..सीधा साधा मामला है, लोग लालू के बारे मे पढना पसन्द करते है. बिहार की सड़को को हेमा मालिनी के गालों की तरह बनाने का वादा हो या रेलवे मे कुल्हड़ की शुरुवात, लालू हमेशा से ही सुर्खियों मे रहे.इन्टरनेट मे आप लालू के लतीफों का अलग ही सेक्शन पायेंगे…. लालू के आलोचक चाहे कुछ भी कहें मेरी नजर मे लालू एक आक्रामक और हाजिरजवाब राजनेता है,जिनका एक अच्छा खासा जनाधार है.
लालू का एक ही सपना है, भारत का प्रधानमन्त्री बनना, अब देंखे इनका यह सपना कब पूरा होता है.
शनिवार, सितंबर 03, 2011
! इंग्लिशवाराष्ट्र !
लालूप्रसाद यादव को तो सभी जानते हैं। वो वही करते हैं जो उन्हें अच्छा लगता है। अब अगर उन्हें देश का प्रधानमंत्री बना दिया जाए तो भारत का तो नक्शा ही बदल जाएगा। और नक्शा बदले या न बदले कुछ तो बदलाव होंगे ही। इन बदलावों पर जरा अपनी नजरें इनायत करें:-1.राष्ट्र परिधान:- धोती कुर्ता 2.राष्ट्र पेय:- ताजा भैंस का दूध 3.राष्ट्र पशु:- भैंस ,4राष्ट्र खेल:- गुल्ली डण्डा, 5राष्ट्र भाषा:- इंग्लिशवाराष्ट्र…
बुधवार, अगस्त 03, 2011
! 1 बॉटल और 4 दोस्त !
बुधवार, जुलाई 06, 2011
! बसंती और गीता !
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