गुरुवार, अप्रैल 10, 2014

शनिवार, मार्च 08, 2014

! श्रीमान लालू प्रसाद यादव कहते हैं !

एक बिहारी लालू प्रसाद यादव =.
दो बिहारियों बूथ कैप्चरिंग दस्ते =.
तीन बिहारियों = जाति हत्या.
चार बिहारियों = पटना के पूरे साक्षर आबादी.

गुरुवार, फ़रवरी 20, 2014

! लालू और राबड़ी !


लालू और राबड़ी एक पार्क में बैठे हुए थे। 
 
तभी उनके सामने एक कुत्ता और कुतिया एक-दूसरे को किस करने लगे। 
 
लालू अपनी पत्नी राबड़ी से बोले - जान, अगर तुम बुरा ना मानो तो मैं भी। 
 
राबड़ी - ओके, नो प्रॉब्लम, लेकिन ध्यान से, कुत्ता काट ना ले.....

शुक्रवार, जनवरी 24, 2014

! लालू ने ली चुटकी, बोले घरवाली को घूरने पर भी होगी सजा !





-पीछा नहीं करेंगे तो कैसे होगा प्यार:



सर्वदलीय बैठक में लडकी को घूरने और पीछा करने के प्रावधानों पर जनता दल (यू) के चीफ शरद यादव ने अजीब तर्क दिया। उनका कहना था कि अगर लडके लड़कियों का पीछा नहीं करेंगे तो प्यार होगा कैसे।



उन्होंने बैठक में कहा, मोहब्बत तो अब खत्म ही हो जाएगा। लडका जब लडकी की तरफ देखेगा नहीं और उसका पीछा नहीं करेगा, तो मोहब्बत कैसे होगी। उन्होंने कहा कि ‘शीला की जवानी’ और ‘मुन्नी की बदनामी’ पर सरकार क्या कर रही है? टीवी पर मर्दो को उत्तेजित करने वाले ऐड दिनभर आते रहते हैं, सरकार को सोचना चाहिए। आप सिनेमा में देखिए.. शीला की जवानी.. आप उसे ठीक से देखना आपका भी मन हिल जाएगा



-घरवाली को देखेंगे तब भी..



आरजेडी चीफ लालू प्रसाद यादव भी बिल के प्रावधानों पर चुटकी लेने में पीछे नहीं रहे। उन्होंने हैरानी जताते हुए कहा कि वह तो अपनी पत्‍‌नी को देखने पर भी फंस जाएंगे।



-मुलायम हुए कनफ्यूज..





समाजवादी पार्टी के चीफ मुलायम सिंह यादव ने तो हद ही कर दी। उन्होंने कहा कि बिल के कड़े प्रावधानों से तो महिला कर्मचारियों का ट्रांसफर रूकवाने वालों को तो जेल जाना पड़ जाएगा। वह इस बात पर काफी देर तक टिके रहे। उन्होंने इसके समर्थन में जब बिल का वह हिस्सा नेता विपक्ष सुषमा स्वराज को दिखाया, तो माजरा समझ में आया।



दरअसल मुलायम सिंह यादव ट्रैफिकिंग को ट्रांसफर समझकर कन्फ्यूज थे। बाद में सुषमा स्वराज ने उन्हें समझाया। उन्होंने कहा, ये महिलाओं के गैरकानूनी तरीके से ले जाने और गैर कानूनी काम में लगाने के लिए है। ट्रांसफर-पोस्टिंग के लिए नहीं।



-मानसिक रूप से अनफिट..



समाजवादी पार्टी के नेता राम गोपाल वर्मा ने तो बिल बनाने वालों को मानसिक रूप से अनफिट घोषित कर दिया। उन्होंने कहा कि यह बिल मानसिक रूप से अनफिट लोगों ने तैयार किया है।



मंगलवार, दिसंबर 24, 2013

! लालू जी स्कूल जाते हैं इंग्लिश सीखने !

एक दिन लालू जी स्कूल जाते हैं इंग्लिश सीखने। 
 
टीचर लालू से  : होमवर्क क्यों नहीं किया ..?
 
लालू  : सर, लाइट नहीं थी ... . .
 
टीचर : तो मोमबत्ती जला लेते ..
 
लालू  : सर, माचिस नहीं थी .... . .
 
टीचर : माचिस क्यों नहीं थी ?
 
लालू  : पूजा घर में रखी हुई थी ... .
 
टीचर : तो वहां से ले आते ...
 
लालू : नहाया हुआ नहीं था ... . .
 
टीचर : नहाया हुआ क्यों नहीं था ..?
 
लालू  : पानी नहीं था सर ... . .
 
टीचर : पानी क्यों नहीं था ..?
 
लालू : सर मोटर नहीं चल रहा था ...
 
टीचर : उल्लू के पट्ठे मोटर क्यों नहीं चल रहा था ..??
.
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लालू  : सर बताया तो ...लाइट नहीं थी ....!!

मंगलवार, नवंबर 19, 2013

! लालू जी स्कूल जाते हैं इंग्लिश सीखने !

एक दिन लालू जी स्कूल जाते हैं इंग्लिश सीखने। 
टीचर लालू से  : होमवर्क क्यों नहीं किया ..?
लालू  : सर, लाइट नहीं थी ... . .
टीचर : तो मोमबत्ती जला लेते ..
लालू  : सर, माचिस नहीं थी .... . .
टीचर : माचिस क्यों नहीं थी ?
लालू  : पूजा घर में रखी हुई थी ... .
टीचर : तो वहां से ले आते ...
लालू : नहाया हुआ नहीं था ... . .
टीचर : नहाया हुआ क्यों नहीं था ..?
लालू  : पानी नहीं था सर ... . .
टीचर : पानी क्यों नहीं था ..?
लालू : सर मोटर नहीं चल रहा था ...
टीचर : उल्लू के पट्ठे मोटर क्यों नहीं चल रहा था ..??
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लालू  : सर बताया तो ...लाइट नहीं थी ....!!

मंगलवार, अक्टूबर 22, 2013

! लालू प्रसाद यादव: यही अन्दाज लालू को बाकी राजनेताओं से अलग करता है !

भारतीय राजनीति में ऐसे कम ही नेता रहे हैं जिन्होंने फर्श से उठकर अर्श तक का सफर तय किया हो. भारत के एक ऐसा ही नेता हैं जो फुलवरिया जैसे छोटे से गांव में मिट्टी के कच्चे घर में पल-बढ़कर और सामंतवादी सोच के लोगों के बीच से उठकर बिहार के मुख्यमंत्री और केंद्र में रेल मंत्री बने. यहां बात हो रही है सबको अपनी बोल-चाल के ढंग से गुदगुदाने वाले लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) की.

Life of LaLu Prasad Yadav


बिहार के गोपालगंज में 1948 में एक गरीब परिवार में जन्मे लालू प्रसाद यादव एक गरीब किसान परिवार से थे. उनके बारे में माना जाता है कि बचपन में वह गाय और बकरी चराने के लिए अपने पिताजी के साथ पीछे-पीछे जाया करते थे.

मंगलवार, सितंबर 10, 2013

गुरुवार, अगस्त 15, 2013

मंगलवार, जुलाई 02, 2013

! ओबामा और लालू !

ओबामा (लालू से) - लालू! तुझे स्विमिंग आती है?
लालू- ना!

ओबामा - शिट्ट, तेरे से तो कुत्ता अच्छा है जो स्विम कर लेता है।
लालू - तुमको आता है स्विमिंगवा?
ओबामा - या! ऑफ कोर्स आता है।
लालू - ससुरा, फिर तोहरे और कुत्ता में फरक का है बे!!!

गुरुवार, मई 30, 2013

! लालू जी की क्लास !

एक बार एक पत्रकार ने लालू यादव से पूछा : लालू जी, बिहार में गरीब औरतों के पास पहनने के लिए कपड़े नहीं हैं, आप इसके लिए क्या कर रहे है?
लालू ने कहा : वैसे करना क्या है बाबू पर पहिले तुम एफ टीवी देखो जाके, कपड़े तो अमीर औरतों के पास भी नहीं हैं.

शनिवार, मार्च 02, 2013

! लालू का बेटा परीक्षा में फेल !

जैसे लालू के बेटे, वैसा ही उनका दोस्त...

राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव बीए प्रथम वर्ष की परीक्षा में फेल हो गए...

इस खबर के बाद मां राबड़ी देवी बहुत दुखी थीं...

उन्होंने उसके कमरे में जाकर पूछा...

राबड़ी: बेटा, का करत हो...

बेटा: एक दोस्त को चिट्टी लिखत हूं...

राबड़ी: पर बेटा, तुमहार लिखना तो आवत नहीं...

बेटा: वह ससुरा भी तो पढ़ना नहीं जानत...!!!


मंगलवार, फ़रवरी 12, 2013

! लालू ने कहा- पगला गये हैं बाबा रामदेव !

नई दिल्‍ली। पहले अरविंद केजरीवाल और अब बाबा रामदेव के विवादास्‍पद बयान के कारण संसद में एक बार फिर जमकर हंगामा हुआ, और इस हंगामे के केंद्र बने बाबा रामदेव। सांसदों में संसद में बाबा के इस बयान को गैरजिम्‍मेदार और आलोकतांत्रिक बताते हुए जमकर इसकी निंदा की। यहां तक लालू प्रसाद यादव ने तो बाबा को पागल ही कह ड़ाला। रामदेव ने कहा था कि संसद के भीतर हत्‍यारे, लुटेर और जाहिल बैठे हैं। बाबा रामदेव ने कहा था कि संसद में कुछ लोग अच्‍छे भी है मगर ज्‍यादातर लोग हैवान हैं। बाबा रामदेव के इस आपत्तिजनक टिप्‍पणी के बाद खासा हंगामा खड़ा हो गया है और चारों तरफ से प्रतिक्रियाएं आनी शुरु हो गई हैं। वहीं समाजवादी पार्टी के सांसद शैलेंद्र कुमार ने बाबा रामदेव को विशेषाधिकार हनन का नोटिस भेजा है। इस मामले पर तारिक अनवर ने कहा है कि उनके बयान को गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है, जबकि कांग्रेस नेता सत्‍यव्रत चतुर्वेदी ने कहा है कि सांसदों की बाबा के सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है। भाजपा के यशवंत सिंहा ने कहा है क‍ि सांसदों का अपमान करके लोग हीरो बनते नजर आ रहे है। आरजेडी अध्‍यक्ष लालू प्रसाद ने बाबा रामदेव को मेंटल केस’ करार दे दिया है। उन्‍होंने कहा कि जब अब्‍दुल कलाम साहब जैसे लोग कह रहे है क‍ि लोकपाल के आने से भ्रष्‍टाचार पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, तो फिर इसपर क्‍यों जोर दिया जा रहा है?

सोमवार, दिसंबर 17, 2012

! खो गई लालू की लालिमा !

बिहार और लालू. एक समय में दोनों एक दूसरे के पर्याय माने जाते थे. प्रदेश की राजनीति में बादशाहत कायम करने वाले मसखरे-से भदेस नेता लालू प्रसाद यादव अब खामोश हैं. बीते विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी की हुई जबरदस्त हार ने उन्हें हरिनाम याद दिला दिया है. बड़बोले लालू के मुंह बोल फूटते नहीं सुना जा रहा. इसे बिहारी राजनीति में दंबई के सूरज का डूबना माना जाता है. इस पराजय ने लालू के बड़बोलेपन पर ब्रेक ही नहीं लगाया है बल्कि उनके द्वंद्व को भी बढ़ा दिया है कि वे अपनी मसखरेपन वाली छवि को त्यागे या फिर “परिपक्व” राजनेता की तरह फिर से उठ खड़े हों. दोराहे पर खड़े लालू की यह सोच रही है कि गंवई अंदाज उन्हें जनता से सीधे जोड़ती है, वहीं उन्हें एक अ-गंभीर नेता के रूप में प्रस्तुत करती है.
सिर्फ राजद ही नहीं बल्कि सूबे में यह फुसफुसाहट स्वर लेने लगी है कि अब लालू युग का अंत हो रहा है. इस युगांत की सुगबुगाहट लालू की लालिमा को धूमिल करने के क्रम में है और इसे वे भी बखूबी समझने लगे हैं. बेटे तेजस्वी को राजनीति के फलक पर ला कर अगली पीढ़ी में अपनी पहुंच बनाने की योजना पर लालू ने वैसे ही सोच को सामने रखा जैसा कि राबड़ी के समय में सोचा था. लेकिन वो समय और था – अब का समय कुछ और. सूबे की राजनीति आरंभ से ही “क्रानी पॉलिटिक्स’’ की रही है. इसकी जटिलता की उलझन में लालू ने अपने लिए दो दशक पहले डोर का सिरा ढूंढ़ लिया था. लेकिन डोर आखिर बगैर सुलझाये कितना खींचा जा सकता है, अंततः वह इस विधानसभा चुनाव में टूट गया. यूं तो 15 वीं लोकसभा चुनाव में ही डोर के कमजोर होने का अंदेशा हो गया था लेकिन लालू ने इस चुनावी वैतरणी को भी इसी के सहारे पार लगाने की कोशिश की जो नाकाम रही. उनके बयानों पर गौर करें – लालू ने पहले तो यह कहा कि अब कोई सवर्ण मुख्यमंत्री नहीं बन सकता तो फिर कुछ दिनों बाद सवर्णों को दस प्रतिशत आरक्षण देने की बात कहकर उन्होंने खुद को हंसी का पात्र बना दिया. इसी तरह छात्रों को साइकिल की जगह मोटरसाइकिल का लॉलीपॉप देकर भी वे खुद को उपहास का पात्र बना रहे थे. इस तरह के बयान उनकी अकुलाहट और अ-गांभीर्यता को परिलक्षित करता है. आजादी के बाद की राजनीति अब अपने परिपक्वता की ओर अग्रसर है और बिहारी जनमानस इस तरह के बयानों को पचा नहीं पा रहा. लालू प्रसाद के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या वाकई वे भविष्य में बिहार की राजनीति में अपने को प्रासंगिक बनाए रखने के लिए ऐसा करने का साहस जुटा पाएंगे? शायद नहीं. दरअसल, लालू को इसका एहसास पहले से ही हो गया था कि इस चुनाव में वे बुरी तरह परास्त होने वाले हैं, इसलिए उन्होंने अपने बेटे तेजस्वी को राजनीति के मैदान में उतार दिया ताकि पांच साल के बाद दूसरी पीढ़ी कमान संभालने के लिए तैयार हो. 1997 में भी लालू प्रसाद ने तब ऐसा ही किया था जब वे चारा घोटाले में नाम आने की वजह से सत्ता छोड़ने वाले थे. तब उन्होंने अपनी पत्नी राबड़ी देवी को बिहार का राजकाज सौंप दिया. फलस्वरूप 1990 में पिछड़ों की राजनीति और सामाजिक न्याय के मसीहा के तौर पर उभरा बिहार का सबसे कद्दावर और करिश्माई नेता धीरे-धीरे अपनी चमक खोने लगा.
उनके जीवन में तीन ऐसे पड़ाव आए जहां से लालू की राजनीति का मर्सिया गाया जाने लगा. पहला पड़ाव, जब लालू प्रसाद का नाम चारा घोटाले में आया. फिर दूसरा पड़ाव जब उन्होंने सत्ता राबड़ी देवी को सौंप दी और फिर तीसरी व अंतिम गलती कि 2005 के चुनाव में परास्त होने के बाद भी सबक न ले सके, अपनी असलियत को नकारते रहे. वास्तव में लालू बिहार में सवर्णों की जकड़न से तंग लोगों की आकांक्षा के तौर पर उभरे नेता थे लेकिन बिहार की सत्ता मिलने के बाद पहले तो उन्होंने खुद को सरकार का मुखिया समझा, फिर खुद को सरकार समझने लगे और आखिरी दौर वह भी आया जब लालू खुद को ही बिहार भी समझने लगे. उनके गुरूर ने उन्हें नायक से अधिनायक बना दिया, जो उन्हें विनाश के इस मुहाने तक ले आया. अगर लालू की राजनीतिक के अतीत और वर्तमान पर नजर दौड़ाएं तो उनकी राजनीति ने अचानक ही यू-टर्न नहीं लिया है. लालू की सबसे बड़ी कमजोरी रही कि वे अपने कार्यकर्ताओं से कभी नजदीकी रिश्ता नहीं बना सके. पूरे सूबे की तो बात छोड़िये, अपने गृह जिले गोपालगंज में भी लालू की पकड़ अब इतनी नहीं रही कि वह छह में से एक भी सीट अपनी पार्टी को दिलवा सके. इस चुनाव में उन्हें अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक नुकसान हुआ है. इसका कारण है कि लालू का “माय” यानी मुसलिम-यादव समीकरण तो पहले ही ध्वस्त हो चुका था, इस बार बड़े पैमाने पर इनके खेमे से यादवी आधार भी खिसका है, वरना कोई कारण नहीं कि 12-13 प्रतिशत आबादी वाले यादव जाति का वोट यदि एकमुश्त लालू के खाते में जाता तो इतनी बुरी हार नहीं होती. वास्तव में जातीय राजनीति का यह सिद्धांत है कि अकेले कोई जाति किसी एक नेता के साथ बहुत दिनों तक नहीं रह सकती. यादव लालू प्रसाद के साथ तभी रहेंगे जब और पिछड़ी जातियां उनके साथ हों. दूसरी पिछड़ी जातियों में आधार खिसकेगा तो यादव भी उनके साथ नहीं रह सकते. ताजा राजनीतिक माहौल में लालू के सामने चुनौतियों का पहाड़ खड़ा है. तीन साल के पहले उन्हें खुद को साबित करने का कोई दूसरा अवसर नहीं आने वाला. 2014 में लोकसभा का चुनाव होगा, तब तक लालू को अपनी नीतियों की समीक्षा करने और सूबे के गांव-गांव तक फिर से अपनी पैठ बनानी होगी. बढ़ती उम्र के साथ उनके सामने नीतीश की खामियों को उजागर करने की भी चुनौती होगी, वरना हरिनाम के जाप के अलावा और कोई और विकल्प नहीं है.

सोमवार, नवंबर 05, 2012

! Watch aur Wife me kya farak hota hai? !



Laloo: Watch bigadti hai to bandh ho jati hai. 

Wifei bigadati hai to shuru ho jati hai.

मंगलवार, अक्टूबर 23, 2012

! email !

B!ll  Gates :- Hamare Country Ma!n Log Aaj Kl Ema!l Se Shaad! Krte Ha!n,

Laloo Prasad Yadav:- B!ll Sah!b J!, Hmare B!har Me!n Tho S!rf Female Se H! Shaad! Krt Ha!n..........

गुरुवार, अगस्त 02, 2012

! लालू की सोच !

लालू प्रसाद यादव अपने पास आए लेटर्स देख रहे थे।

 अचानक वह चीख पड़े, अरे! इस लेटर के अड्रेस में लिखा है, बिहार का सबसे बड़ा बेवकूफ।

 वहां मौजूद एक आदमी ने कहा: इस आदमी की हिम्मत कैसे हुई आपको ऐसा लेटर भेजने की?

 लालू ने कहा: इससे मुझे मतलब नहीं, लेकिन पोस्टमैन ने इसे सही पते पर कैसे पहुंचा दिया?

बुधवार, जून 06, 2012

! लालू प्रसाद यादव निर्मल दरबार मे !

लालू :- बाबा जी को प्रणाम
बाबा :- कहा से आए हो
लालू :- घर से
बाबा :- मेरा मतलब है कहा रहते हो
लालू :- अब का प्रशनवा पूछ रहे हो, घर मे ही रहता हूँ ओर का तबेले मे रहूँगा ?
बाबा :- नाम क्या है
लालू :- लालू प्रसाद यादव
बाबा :- लालू की जगह चालू लिखा करो
लालू :- चालू तो हम है ओर देखिये ये लिखने पढ़ने की बाते ना करे तो ही ठीक रहेगा
बाबा :- ये चारा क्यू आ रहा है बीच मे,चारा खाया है कभी
लालू :- उ तो कई बरस पुरानी बात है अब तो मामला दब चुका है
बाबा :- यही कृपा रूक रही है जाओ थोड़ा चारा खाओ कृपा आनी शुरू हो जाएगी
लालू :- बुदबर्क समझे हो का हम चारा कैसे खा सकते है
बाबा :- तूमने ही तो कहा है की खाया था
लालू :- उ तो कागजो मे खाया था
बाबा :- तो अब की बार प्लेट मे खाना
लालू :- चल ससुर का नाती कुछ ओर इलाज बता
बाबा :- ये माया क्यू आ रही है बीच मे
लालू :- आरे आप गलत दिशा मे जा रहे है, माया तो यूपी मे है तनिक दूसरी ओर आइए ममता को देखिये
बाबा :- मूर्ख मैं उस माया की नहीं इस माया की बात कर रहा हु धन की दोलत की
लालू :- धन तो सुर्क्षित है विदेस मे है ना
बाबा :- तो अपने देश मे लाओ ओर थोड़ा मेरे अकाउंट मे डलवाओ
लालू :- तोहार का ना डलवा दूँ जेलवा मे
बाबा :- आप तो गरम हो रहे है कुछ ठंडी चीज खाइये , रबड़ी ये रबड़ी कहा से आ रही है बीच मे
लालू :- अरे हो ढोंगी बाबा हमरी दुलहनवा का नाम ना ले तो ही ठीक रहेगा, हमका का बुदबर्क समझे हो हम देश का नेता है देश चलाता है ओर तू हमका चला रहे हो
बाबा :- प्रभु गुरुदेव कोई रास्ता बताइये की हमारे धंधे को कानूनी लाइसेन्स मिल जाये
लालू :- ठीक है जाइए अपनी कमाई का आधा हिस्सा हमरे खाते मे डलवाईए लालटेन जलाईए सरकारी कृपा आनी शुरू हो जाएगी

रविवार, मई 06, 2012

! लव मैरेज और अरेंज मैरेज !

लालू से किसी ने लव मैरेज और अरेंज मैरेज के बीच का फर्क पूछा। 

लालू : - मैरेज का मतलब अपनी गर्लफ्रेंड को अपनी वाइफ बनाना। और, अरेंज मैरेज का मतलब किसी दूसरे की गर्लफ्रेंड को अपनी वाइफ बनाना।